संघर्ष ही जीवन हैं
एक बार की
बात हैं, एक
गाँव मे एक
कुम्हार हरीराम और उसका
बेटा राजाराम बड़े
प्यार से रहते
थे|
हरीराम बहुत ही
मेहनती एवं कुशल
कुम्हार था, साथ
ही साथ उसका पुत्र राजाराम
भी बहुत ही
मेहनती था, परंतु
राजाराम का नज़रिया यह था
की मटके बनाना
तो बहुत ही
आसान हैं, कभी
भी सिख लूँगा|
इस कारण उसने
कभी भी अपने
पुस्तैनी काम को
ना ही सराहा
और ना ही
अपने पिता से
सीखने की कोशिश
की|
समय का चक्र
चलता रहा और
देखते ही देखते
हरीराम एक वृद्ध
मे तब्दील हो
गया| अतएव काम
का सारा बोझ
उसके बेटे राजाराम
के कंधो पे
आ गया, परंतु
उसे तो मटके
बनाना आता ही
कहा था| शुरू
मे तो राजाराम
काम को टालता
रहा, किंतु जब
खाने के लाले
पड़ने लगे, दो
वक़्त का खाना
मिलना भी मुश्किल
हुआ, सब साथियो
ने मदद के
लिए मना कर
दिया, और सब
रास्ते बंद हो
गये| तब उसने
मटके बनाने की
कोशिश की, किंतु
शायद उसे यह
पता ना था
की कोई भी
कला इतनी आसान
नही होती|
चूँकि राजाराम बहुत ही
परिश्रमी और मेहनती
था, उसने बहुत
समय दिया और
कई सारे घड़े
बनाए परंतु एक
भी बाज़ार मे
विक्रय के योग्य
ना था| उसका
धैर्य खो चुका
था और वो
बहुत परेशान था|
उसे इतना तो
समझ आ गया
था के कोई
भी काम या
कला सीखना इतना
आसान नही हैं,
और उस कला
मे दक्षता पाना
तो एक जीवन
भर अनंतिम चलने
वाला संघर्ष हैं|
उसका नज़रिया बदला,
परंतु जीवन का
काफ़ी समय उसने
यह सीखने मे
ही खर्च कर
दिया की कोई
भी काम सरल
नही चाहे वो
मटके बनाना हो
या झाड़ू लगाना|
तभी उसका बूढ़ा
बाप उसके पास
आया और उसके
निराश होने का
कारण पूछा|
राजाराम बोला, "पिताजी, मुझे
माफ़ कर दीजिए,
मैने अपने काम
को बहुत सरल
समझा और उसे
सीखने का गंभीर
प्रयास कभी नही
किया, किंतु मुझे
आप यह काम
अब सीखा दे|"
उसके पिता हरीराम
की आखो मे
आँसू आ गये
और वो बोले,
"बेटा, देर आए
दुरुस्त आए| किसी
भी काम को
सीखने की शुरुआत
कभी भी की
जा सकती हैं|
तुम मेहनती हो
और अपना धैर्य
मत खोओ| अपने
प्रयास दो गुने
कर दो, दस
गुने कर दो,
दिन-रात एक
कर दो! फिर
देखो, सफलता तुम्हारे
हाथ मे होगी|
तुम एक नया
आदर्श प्रस्तुत करो|"
हरीराम की यह
बाते राजाराम के
दिल और दिमाग़
पर गहरा प्रभाव
छोड़ती हैं, और
वो अपने पिता
के दिशा-निर्देशन
मे एक बार
फिर प्रयास करता
हैं| एक मटका
बनाता हैं, उसके
पिता उसमे दसो
कामिया निकालते हैं और
उसे सुधारने के
तरीके भी बतलाते
हैं| इस तरह
कई दिनो के
अथक प्रयासो के
पश्चात, वो बहुत
सारे सुंदर मटके
बनाता हैं| हर
रंग के, कई
प्रकार के, और
अलग-अलग रंगो
के मटके|
जब बाज़ार मे वो
उन मटको को
लेके जाता हैं,
सब व्यापारी और
खरीददार उसकी रचना
से अभिभूत हो
जाते हैं| सारे
मटके सबसे बेहतरीन
दामो पर बिकते
हैं, और कुछ
ही समय मे
राजाराम नगर-प्रसिद्ध
कुम्हार हो जाता
हैं, जिसका यश
सभी दिशाओ मे
फैल जाता हैं|
कथा-सार:
किसी काम को
छोटा मत समझो;
धैर्य रखो; हिम्मत
ना हारो; आपके
पिता आपके सबसे
बड़े मार्गदर्शक हैं|
नज़रिया बदलो, नज़ारे बदल
जाएंगे दोस्तो|
